स्टेल्थ विमान भी अब आएंगे पकड़ में, चीन ने विकसित की नई टेक्नॉलजी

पेइचिंग
चीन की एक मिलिटरी टेक्नॉलजी कंपनी ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को यह ऐलान कर चौंका दिया है कि उसने एक ऐसा रडार बनाने में कामयाबी हासिल की है जो स्टेल्थ विमानों को भी डिटेक्ट कर सकेगा। स्टेल्थ वे विमान होते हैं जो किसी रडार की पकड़ में नहीं आते। यह नई टेक्नॉलजी 100 किलोमीटर दूर मौजूद ‘अदृश्य’ टारगेट का पता लगा सकेगी।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक यह नई टेक्नॉलजी जिस ‘प्रेतरूपी’ फनॉमिनन पर आधिरित है उसे क्वान्टम इनटैंगलमेंट कहा जाता है जिसे अलबर्ट आंइसटाइन ने “स्पूकी ऐक्शन ऐट अ डिसटेंस” नाम दिया था।

चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नॉलजी ग्रुप कॉर्पोरेशन (CETC) सरकार द्वारा नियंत्रित टॉप 10 मिलिटरी इंडस्ट्री ग्रुप्स में शामिल है। कंपनी ने रविवार को बताया कि इस नए रडार सिस्टम के इनटैंगल्ड फोटॉन्स ने हाल ही में हुए फील्ड टेस्ट में 100 किलोमीटर दूर मौजूद टारगेट्स को डिटेक्ट कर लिया।

इस नई टेक्नॉलजी की क्षमता, कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और अमेरिका के रिसर्चर्स द्वारा संयुक्त रूप से पिछले साल विकसित किए गए लैबरेटरी प्रोटोटाइप (प्रतिकृति) की क्षमता से पांच गुना ज्यादा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका की डिफेंस अडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी ने भी ऐसी रिसर्ज को फंडिंग दी है और लॉकहीड मार्टिन जैसे मिलिटरी सप्लायर्स भी ऐसे क्वॉन्टम रडार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स की प्रगति कहां पहुंची है, यह नहीं पता चल सका है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि वे इस नई टेक्नॉलजी के बारे में जानकर हैरान रह गए क्योंकि अभी तक ऐसी बातें सिर्फ काल्पनिक कहानियों में ही सुनने को मिलती थीं। वहीं CETC ने कहा है कि क्वॉन्टम रडार का फायदा सिर्फ यह नहीं है कि वह स्टेल्थ विमानों को डिटेक्ट कर पाएगा बल्कि इसके फील्ड टेस्ट ने पूरी तरह नई रिसर्च के लिए रास्ता भी खोल दिया है।

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