ट्रंप की नई नीति से मिलिटरी ड्रोन की खरीद होगी आसान, भारत को होगा फायदा

वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सरकारी एजेंसियों को आदेश दिया है कि विदेशों में तेजी से हथियारों की बिक्री को विस्तार दिया जाए। इसमें सहयोगी देशों की सेनाओं को अडवांस्ड ड्रोन के निर्यात की बात कही है। वाइट हाउस के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। भारत जैसे देशों के लिए इस तरह का कदम काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

वाइट हाउस के प्रेस सेक्रटरी साराह सैंडर्स ने बताया कि ट्रंप ने अमेरिका में बने मानवरहित एरियल सिस्टम के निर्यात के लिए नई प्रशासनिक नीति बनाने की बात भी कही है। यह कदम भारत जैसे देशों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। भारत बड़ा डिफेंस पार्टनर होने के नाते अमेरिका से बड़ी मात्रा में हथियार और सर्विलांस ड्रोन खरीदने की प्लानिंग कर रहा है।

भारतीय सेना ने आने वाले 10 साल में 400 ड्रोन की मांग की है, इनमें कॉम्बैट और सबमरीन से लॉन्च होने वाले रिमोट पायलेटेड एयरक्राफ्ट के साथ-साथ हाई एनर्जी लेजर और हाई पावर माक्रोवेव्स की क्षमता वाले एनर्जी हथियार भी शामिल हैं। ये हथियार दुश्मन के किसी भी लक्ष्य और सैटलाइट को तबाह करने में काफी कारगर हैं।

रक्षा मंत्रालय के नए ‘टेक्नॉलजी पर्सपेक्टिव ऐंड कैपेबिलिटी रोडमैप 2018’ में ऐसी कई सैन्य क्षमताओं की बात कही गई है ताकि 2020 तक की देश की अक्रामक और रक्षात्मक सैन्य अवाश्यकताओं के बारे में जानकारी दी जा सके।

सैंडर्स ने गुरुवार को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नैशनल सिक्यॉरिटी प्रेजिडेंशल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें नई कन्वेंशनल आर्म्स ट्रांसफर (सीएटी) पॉलिसी को मान्यता दी गई है। नई सीएटी पॉलिसी राष्ट्रपति की नैशनल सिक्यॉरिटी स्ट्रैटेजी में उनकी प्राथमिकताओं को दर्शाती है, जिसके तहत सभी अमेरिकी सरकारी एजेंसियां प्रस्तावित हथियारों के ट्रांसफर की समीक्षा और उनका मूल्यांकन करेंगी और अमेरिकी कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक रक्षा बिक्री को मंजूरी देंगी।

सैंडर्स ने कहा, ‘ये नई नीतियां अमेरिकी सहयोगियों और भागरीदारों को मजबूती देंगी। इसके अलावा अमेरिकियों के रोजगार के अवसरों का विस्तार करेंगी और संयुक्त सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाएंगी। इस नीति में राष्ट्रपति ने अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाया है।’

अमेरिकी इंडस्ट्री दुनिया में सबसे प्रभावी रक्षा प्रणालियों का निर्माण करने की बात करते हुए सैंडर्स ने कहा, ‘ये घोषणाएं हमारे सहयोगियों को मजबूत करने, विनिर्माण और रक्षा औद्योगिक आधार का समर्थन करने और अमेरिकी नौकरी निर्माण और नवाचार को चलाने के लिए सरकारी व्यापक पहल की कड़ी का एक महत्वपूर्ण कदम हैं।’

ट्रेड ऐंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी को लेकर राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नेवारो ने रिपोर्टर्स को बताया कि सहयोगियों और भागीदारों की अमेरिकी हथियारों तक पहुंच को बढ़ाने से चीन पर न सिर्फ निर्भरता कम हो जाएगी, बल्कि रशियन सिस्टम पर भी प्रतिबंध होगा, जो अमेरिका के प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ प्रतिबंध अधिनियम के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि यूएएस टेक्नॉलजी में अमेरिका सबसे आगे है। वहीं चीन जैसे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी अक्रामक रूप से अपनी मार्केटिंग कर रहे हैं। आने वाले 10 साल में इसका अंतरराष्ट्रीय बाजार 50 बिलियन डॉलर होने की संभावना है।

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