ब्रिटेन के वीजा नियमों में बदलाव से भारतीय स्टूडेंट्स को नुकसान मगर प्रफेशनल्स को होगा फायदा

लंदन
ब्रिटेन की सरकार ने शुक्रवार को वीजा आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए तैयार की गई सूची से भारत को अलग कर के इंडियन स्टूडेंट्स को झटका दिया लेकिन उसकी आव्रजन नीति में बदलाव की तैयारी से भारत जैसे देशों के प्रफेशनल्स को फायदा होगा। दरअसल, ब्रिटेन ने अपनी आव्रजन नीति में बदलाव कर इसे संसद में पेश किया है। इन बदलावों में भारत जैसे देशों के उच्च प्रशिक्षित प्रफेशनल्स के लिए कड़े वीजा कोटा नियमों की समीक्षा करना शामिल है।

बदलाव से सालाना 20 हजार 700 वीजा जारी करने वाली विवादित तय सीमा से निजात मिल सकती है। दिसंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच जॉब ऑफर पाए करीब 1000 टेक प्रफेशनल्स को वीजा नहीं मिला था।

ब्रिटेन की इस पहल की भारत और ब्रिटेन के उद्योगों ने सराहना की है। आव्रजन नीति में बदलाव से उन उद्योगों को अपने यहां सेवा देने के लिए भारत जैसे देशों से प्रफेशनल्स लाने में आसानी होगी और इसके साथ ही भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को भी काफी लाभ होगा।

ब्रिटेन के आव्रजन मंत्री केरोलाइन नोक्स ने बताया, ‘आज के इन बदलावों से हम अपनी फ्रंटलाइन सेवाओं की मांगों को पूरा करने में सक्षम होंगे और अपने उद्योगों के लिए अच्छे पेशेवरों को भी आकर्षित कर सकेंगे।’ फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (फिक्की) के अध्यक्ष रशेश शाह ने कहा, ‘भारतीय प्रफेशनल्स की पुरानी मांगों के बीच ब्रिटिश सरकार की ओर से टियर टू वीजा कैटिगरी को आसान बनाने का कदम एक स्वागतयोग्य घटनाक्रम है। यूके सरकार का यह कदम निश्चित रूप से उच्च कुशल पेशेवरों के आने जाने को सुगम बनाएगा और लंबे समय तक ब्रिटेन के उद्योग की समग्र प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि करेगा।’

ब्रिटेन में डाक्टरों-नर्सों की कमी और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में आ रही कठिनाईयों को देखते हुए सरकार ने पहले ही यह घोषणा की थी कि यूरोपीय संघ के बाहर के देशों से आने वाले चिकित्सकों और नर्सों को टियर टू वीजा से छूट होगी। कन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री के मुख्य नीति निर्देशक मैथ्यू फेल ने बताया , ‘इंडस्ट्री इन सुधारों का स्वागत करेगी क्योंकि यह एक अच्छा कदम है। अंतरराष्ट्रीय कौशल और प्रतिभा ब्रिटेन के वैश्विक नियोक्ताओं का मुख्य आधार है।’

उन्होंने कहा, ‘एक सफल आव्रजन प्रणाली को ब्रिटेन के समाज और यहां की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले लोगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए न कि संख्या पर । जबतक आव्रजन व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, नौकरी सृजित करने और वृद्धि के लिए जरूरी लोगों को अपने यहां बुलाने के लिए उद्योग और व्यापार जगत संघर्ष करते रहेंगे।’

प्रफेशनल्स को राहत लेकिन स्टूडेंट्स के लिए आफत
भले ही ब्रिटेन आव्रजन नीति में बदलाव को लेकर प्रफेशनल्स के बीच खुशी का माहौल हो लेकिन भारतीय छात्रों के लिए यह खबर अच्छी नहीं है। ब्रिटेन के गृह मंत्रालय ने लगभग 25 देशों के विद्यार्थियों के लिए टियर -4 वीजा श्रेणी में ढील की घोषणा की। इस सूची में अमेरिका, कनाडा और न्यूजीलैंड जैसे देश पहले से ही शामिल थे। गृह मंत्रालय ने अब इन देशों में चीन, बहरीन और सर्बिया जैसे देशों को इसमें शामिल किया है। इन देशों के विद्यार्थियों को ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए शिक्षा, वित्त और अंग्रेजी भाषा जैसे मानकों पर कम जांच से गुजरना होगा। नई सूची में भारत को शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि समान पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन करने वाले भारतीय विद्यार्थियों को कड़ी जांच व दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

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