इतिहास की बात होगी ट्रेनों का लेट होना, इन 5 तरीकों से गति बढ़ाएगा रेलवे

आकाश सिन्हा, नई दिल्ली
ट्रेनों का धीमी गति से और देरी से चलना अब इतिहास की बात हो सकता है। ट्रेनों की देरी को खत्म करने के लिए रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने बहुस्तरीय योजना तैयार की है। 1 नवंबर से रेलवे का नया टाइम टेबल लागू हो गया है। इससे करीब 500 ट्रेनों का यात्रा समय 15 मिनट से तीन घंटे तक कम हो जाएगा। उत्तर रेलवे की 65, दक्षिण रेलवे की 51 एक्सप्रेस और 36 पैसेंजर ट्रेनों की स्पीड नए टाइम टेबल के चलते बढ़ गई है। ईस्ट कोस्ट रेलवे की 37 एक्सप्रेस और 19 लोकल पैसेंजर ट्रेनों की गति बढ़ी है।

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फिर भी यह सवाल बना हुआ है कि पीयूष गोयल के पास ऐसी कौन सी जादू की छड़ी है, जिससे ट्रेनें सही गति समय पर चलने चलेंगी? असल में ट्रेनों की गति को बढ़ाने के लिए बहुत से छोटे-बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा कई योजनाएं अब भी पाइपलाइन में हैं। जानें, किन तरीकों से ट्रेनों को गति देगा रेलवे…

अपग्रेड होगा इन्फ्रास्ट्रक्चर
रेलवे ने ट्रेनों की गति को बढ़ाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें रेल लाइनों को दोहरीकरण करना और पुराने ट्रैकों को बदलना शामिल है। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा ट्रेनों को ठहराव के लिए कई स्टेशनों को विकसित किया जा रहा है। फिलहाल बड़ी संख्या में ऐसे स्टेशन हैं, जिनमें बहुत कम ट्रेनें ही रुक सकती हैं। ऐसे में कई ट्रेनों को दूसरी ट्रेनों के निकलने के इंतजार में आउटर पर खड़े रहना पड़ता है।

कम होगा रुकने का समय
स्टेशनों पर ट्रेनों के रुकने के समय को भी कम किया जाएगा। इसके अलावा कम दबाव वाले स्टेशनों पर रुकने वाले ट्रेनों की संख्या को कम किया जाएगा।

ऑटोमेटिक सिग्नल
ऑटोमेटिक सिग्नलिंग की व्यवस्था से दो ब्लॉकों के बीच में एक समय पर ट्रेनों की संख्या में इजाफा हुआ है। इससे पहले दो स्टेशनों के बीच एक ही ट्रेन दौड़ती थी। अब ऑटोमेटिक सिग्नलिंग के चलते दो स्टेशनों के बीच 6 ट्रेनें दौड़ सकेंगी। एक ही ट्रैक पर चलने वाली ट्रेनों की संख्या में इजाफे से देरी में कमी होगी।

नए कोच और इंजनों से मिलेगी रफ्तार
रेलवे ने नए लिंक हॉफमैन बुश कोच ट्रैक पर उतारे हैं, जो परंपरागत कोचों के मुकाबले काफी हल्के हैं। ये कोच 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं। इसके अलावा नए लोकोमोटिव्स की स्पीड भी काफी है। ये 130 किमी से 150 किमी प्रति घंटा तक दौड़ सकते हैं। अब तक 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली कई ट्रेनें 130 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चल सकेंगी।

जर्मनी की मदद
देश के मौजूदा रेल कॉरिडोर्स को सेमी हाईस्पीड के योग्य बनाने के लिए रेल मंत्रालय ने जर्मन रेलवे के साथ एक डील की है। सेमी हाईस्पीड ट्रेनें 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगी। फिलहाल जर्मन रेलवे चेन्नै-काजीपेट के 643 किमी कॉरिडोर का फिजिबिलिटी सर्वे कर रहा है।

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